भगवान महावीर की विशुद्ध परम्परा निग्र्रन्थ, श्रमण, सुविहित आदि विविध रूपों का पार करती हुई समय के प्रभाव से स्थानकवासी के नाम से पुकारी जाने लगी। ‘स्थानक’ शब्द का अर्थ बहुतव्यापक और उत्कृष्ट उद्देश्यों का द्योतक रहा है। यह पौषध, संवर, समायिक आदि धार्मिक क्रियाओं को सम्पन्न करने का स्थान है। छः काय के जीवों…